श्री राधा सुख चंद देखि
Brajanidhi Granthavali — श्री ब्रज निधि जी
Verse 5 of 12
(राग विभास)
श्री राधा-सुख-चंद देखि कोटि चंद वारौं। [1]
दसनन पर दामिनि नासा पर कीर,
भौंह धनुष नैन निरखि त्रिबिधि ताप जारों॥ [2]
अंग अंग छबि-तरंग रूप की उजारी,
बिधिना यह रुचिर रुची त्रिभुवन महि नारी। [3]
भूषण नव जगमगात नीलांबर सारी,
‘'ब्रजनिधि’ पिय बस किए गोबिंद पिय प्यारी॥ [4]
- श्री ब्रज निधि जी, ब्रज निधि ग्रंथावली, ब्रजनिधि पद संग्रह (122)
(राग विभास) श्री राधा-सुख-चंद देखि कोटि चंद वरौं। [1] दशानन पर दामिनी, नासिका पर कीर, भ्रु धनुष, नयन, निरखि, त्रिबिधि, तप, जरोन.. [2] अंग, अंग, छवि तरंग रूप ज्योति बिधिना, ये रुचि रुचि त्रिभुवन मही नारी। [2]