कुँवरि किसोरी नवल पिय करत परस्पर हेत
Brajanidhi Granthavali — श्री ब्रज निधि जी
Verse 7 of 12
तीर्थ सबै देखे सुने, कोउ नहिं या तूल।
ब्रज अवनी रगमगी रही, कृष्ण चरन अनुकूल॥
- श्री ब्रज निधि जी, ब्रज निधि ग्रंथावली, ब्रज शृंगार (4)
तीरथ के बारे में सब देखते-सुनते हैं, लेकिन यहां कोई नहीं है. ब्रज अवनि रागमगि रहि, कृष्ण चरण अनुकूल.. - श्री ब्रज निधि जी, ब्रज निधि ग्रंथावली, ब्रज श्रृंगार (4)