या वृंदावन की बानिक याही पै बनि आवै

Brajanidhi Granthavali — श्री ब्रज निधि जी

Verse 8 of 12

या वृंदावन की बानिक याही पै बनि आवै। यह जमुना यह पुलिन मनोहर यह बंसीबट जहां मोहन बेन बजावै॥ [1] यह तरु सघन भूमि हरियारी ये मृग मृगी पंछिन की श्रवण सुहावै। ‘ब्रजनिधि’ यह राधा कौ बाग सोही बड़भाग जो या सों अनुराग करि याही के गुन गावै॥ [2] - श्री ब्रज निधि जी, ब्रज निधि ग्रंथावली, ब्रजनिधि पद संग्रह (112) या यह स्थान वृन्दावन जैसा हो गया है। यही है यमुना, यही है सुन्दर पुल, यही है बंसीबाट जहाँ आये थे मोहन बेन बजाऊ.. [1] यही है वृक्षों की सघन भूमि, यही है हरियाली, यही है मृग और पक्षियों का सुहावना श्रवण। 'ब्रज निधि' इस राधा का गुण गाती है, 'कौ बाग सोहि बड़भाग या पुत्र अनुराग कारी'.. [2] - श्री ब्रज निधि जी, ब्रज निधि ग्रंथावली, ब्रज निधि पद संग्रह (112)
कुँवरि किसोरी नवल पिय करत परस्पर हेतनित हित चित के माहि, लाल किसोरी रटतु हैं