नित हित चित के माहि, लाल किसोरी रटतु हैं
Brajanidhi Granthavali — श्री ब्रज निधि जी
Verse 9 of 12
नित हित चित के माहि, लाल किसोरी रटतु हैं।
और न कछू सुहाहिं, राति-दिवस यों कटतु हैं॥
- श्री ब्रजनिधि जी, ब्रजनिधि ग्रंथावली, प्रीति लता (31)
लाल किसोरी रैटटौ हर रुचि की जननी है। अब खुशी का ठिकाना नहीं, शादी के दिन ऐसे होते हैं... - श्री ब्रजनिधि जी, ब्रजनिधि ग्रंथावली, प्रीति लता (31)