कुँवर चलो जू आगे
Govind Svami Vani — श्री गोविन्द स्वामी
Verse 10 of 26
(राग मल्हार)
झूलत नवल बिहारी हिंडोरे।
संग झूलत वृषभानुनंदिनी प्रानहुं ते प्यारी॥ [1]
नीलांबर पीतांबर की छबि घनदामिनी अनुहारी।
पुलकि पुलकि प्रीतम उर लागत गोविंद जन बलिहारी॥ [2]
- श्री गोविन्द स्वामी, श्री गोविन्द स्वामी जी की वाणी
(राग मल्हारा) झूलत नवल बिहारी हिंडोरे। मेरे साथ झूलती वृषभानुंदिनी सबसे मधुर है। [1] घंदामिनी के चेहरे के साथ नीलानबर और पीतानबर की छवि। पुलकि पुलकि प्रीतम उर लगत गोविंद जन बलिहारी.. [2] - श्री गोविंद स्वामी, श्री गोविंद स्वामी जी की वाणी