आजु बनी अति सारंग नैनी
Govind Svami Vani — श्री गोविन्द स्वामी
Verse 9 of 26
जा पथ कौं पथ लेत महामुनि,
मूंदत नैंन, गहैँ नित नाँकौ। [1]
जा पथ कौं पछितात हैं वेद,
लहैं नहिं भेद, रहैं जकि जाकौ॥ [2]
सो पथ श्रीहरिदास लह्यौ,
रस-रीति की प्रीति चलाइ निसाँकौ। [3]
निसाननि बाजत, गाजत ‘गोविंद’!
रसिक अनन्यनि कौ पथ बाँकौ॥ [4]
- श्री गोविन्द स्वामी, श्री गोविन्द स्वामी जी की वाणी
आप कौन सा मार्ग अपनाएंगे महामुनि? [1] वेद के मार्ग पर चलने वाले में कोई मतभेद नहीं होता, चलते रहो... [2] अत: श्री हरिदास के मार्ग पर चलो, बिना किसी हिचकिचाहट के रस-रीति के प्रेम का पालन करो। [3] निस्सन्नी बजात, गजट 'गोविंदा'! रसिक अनन्यानि कौ पथ बंकौ। [4] - श्री गोविंद स्वामी, श्री गोविंद स्वामी जी के वचन