कुँवर चलो जू आगे

Govind Svami Vani — श्री गोविन्द स्वामी

Verse 11 of 26

(राग मल्हार) झूलत सुरंग हिंडोरे राधा मोहन। वरन वरन तन चूनरी पहिरे ब्रजबधू चहुँ ओरे॥ [1] राग मल्हार अलापत सप्तसुर तीन ग्राम जोरे। मदनमोहनजू की या छबि ऊपर गोविन्द बल तृण तोरे॥ [2] - श्री गोविन्द स्वामी, श्री गोविन्द स्वामी जी की वाणी (210) (राग मल्हारा) झूलत सुरंग हिंदोरे राधा मोहन। वरण वरण तन चुनरी पहरे ब्रजबधु चहुँ ओरे.. [1] राग मल्हार अलापत सप्तसुर तीन ग्राम जोरे। या मदनमोहनजू गोविंद बाल त्रिन तोरे की छवि.. [2] - श्री गोविंद स्वामी, श्री गोविंद स्वामी जी की वाणी (210)
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