कुँवर चलो जू आगे

Govind Svami Vani — श्री गोविन्द स्वामी

Verse 12 of 26

(राग मल्हार) झूलत सुरंग हिंडोरे राधामोहन। वरन वरन तन चूनरी पहिरे ब्रजबधू चहुँ ओरे॥ [1] राग मल्हार अलापत सप्तसुर तीन ग्राम जोरे। मदनमोहनजू की या छबि ऊपर गोविन्द बल त्रन तोरे॥ [2] - श्री गोविन्द स्वामी, श्री गोविन्द स्वामी जी की वाणी (210) (राग मल्हारा) झूलट सुरंग हिंदौर राधामोहन। वरण वरण तन चुनरी पहरे ब्रजबधु चहुँ ओरे.. [1] राग मल्हार अलापत सप्तसुर तीन ग्राम जोरे। ऊपर मदनमोहनजू या गोविंद बाल त्राण तोरे की छवि.. [2] - श्री गोविंद स्वामी, श्री गोविंद स्वामी जी की वाणी (210)
कुँवर चलो जू आगेहमें बृजराज लाड़िले सों काज