कृपा अवलोकन दान दैरी

Govind Svami Vani — श्री गोविन्द स्वामी

Verse 15 of 26

राग सारंग कृपा अवलोकन दान दैरी। महादान वृषभानु कुमारी। तृषित लोचन चकोर मेरे तुव वदन इंदु किरन पान दैरी॥ सब विध सुघर सुजान सुन्दरी सुनी विनती कान दैरी। गोविन्द प्रभु पिय चरन परस कहै याचक को तू मान दैरी॥ - श्री गोविन्द स्वामी, श्री गोविन्द स्वामी जी की वाणी (47) दिन-प्रतिदिन की कृपा का एक रंगीन अवलोकन। महादान वृषभानु कुमारी। मेरे प्यासे लोचन चकोर, इंदु किरणों से भर गया मेरा शरीर... सब प्रकार से मधुर, सुंदर और मनोहर, हर विनती सुनो। गोविंद प्रभु पिया चरण पारस कहते हैं, तुम हृदय दो याचक को.. - श्री गोविंद स्वामी, श्री गोविंद स्वामी जी की वाणी (47)
काले ही मोहन, काले ही सोहनकुँवर चलो जू आगे