कुँवर चलो जू आगे
Govind Svami Vani — श्री गोविन्द स्वामी
Verse 16 of 26
(राग मल्हार)
कुँवर चलो जू आगे गहवर में जहाँ बोलत मधुरै मोर।
विकसित वन राजीव तहाँ कोकिला करत रोर॥ [ 1 ]
मधुरे वचन सुनत प्रीतम के लीनो प्यारी चित्त चोर।
गोविन्द बलि बलि पिय प्यारी की जोर॥ [ 2 ]
- श्री गोविन्द स्वामी, श्री गोविन्द स्वामी जी की वाणी (188)
(राग मल्हारा) कुँवर चलो उस गुफा में चलें जहाँ मधुराई मोर गाता है। विकसित वन राजीव, वहाँ बुलबुल दहाड़ती है.. [1] प्रिय हृदय चोर, प्रियतम की मधुर वाणी सुनो। गोविंद बाली बाली पिया प्यारी की जोर.. [2] - श्री गोविंद स्वामी, श्री गोविंद स्वामी जी की आवाज (188)