आजु बनी अति सारंग नैनी

Govind Svami Vani — श्री गोविन्द स्वामी

Verse 19 of 26

मनमोहना रसमत्त पियारों, छाँड़ि सकल कुल लाज। जस अपजस कोऊ कहो, मोहि नाहिंन काहू सों काज॥ - श्री गोविन्द स्वामी, श्री गोविन्द स्वामी जी की वाणी (128.1) मनमोहन रसमत्त प्यारो, चण्डी सकल कुल लाज। जस अपजस कू कहो, मोहि नहिन्न काहू पुत्र काज.. - श्री गोविंद स्वामी, श्री गोविंद स्वामी जी की वाणी (128.1) मैंने मनमोहन के प्रेम के नशे में चूर होकर लोक-लाज और कुल-मर्यादा को सर्वथा त्याग दिया है। अब चाहे किसी को शोहरत मिले या बदला - मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता.
काले ही मोहन, काले ही सोहनमुख सों मुख मिलाय देखत आरसी