काले ही मोहन, काले ही सोहन

Govind Svami Vani — श्री गोविन्द स्वामी

Verse 21 of 26

(राग धनाश्री) पीरे कुन्डल पीरे नूपुर पीरो पीताम्बर ओढ़े ठाड़ो। पीरी बरनी कटि काछनी लाल की पीरो छोर रच्यो पटका को॥ [1] पीरे लकुट मुकुट कर सोहे पीरी खोर दियो छिन गारो। गोविन्द प्रभु की शोभा जो निरखो पीरोई नन्दन नन्द दुलारो॥ [2] - श्री गोविन्द स्वामी, श्री गोविन्द स्वामी जी की वाणी (राग धनाश्री) पीरे कुंडल पीरे नुपुर पीरो पीताम्बर ओढ़ाये ठाड़ो। पीरी बरनी कटि कचनी लाल की पीरो, छोड़ो पटाखा.. [1] पीरी लकुट मुकुट सोहे पीरी खोर दियो छीन लो। निर्भय नंदन और अपने प्रियतम को मिलाने वाले गोविंद प्रभु की जय... [2] - श्री गोविंद स्वामी, श्री गोविंद स्वामी जी के वचन
मुख सों मुख मिलाय देखत आरसीप्रीतम प्रीत ही ते पैये