प्रीतम प्रीत ही ते पैये
Govind Svami Vani — श्री गोविन्द स्वामी
Verse 22 of 26
(राग नट)
प्रीतम प्रीत ही ते पैये। [1]
यद्यपि रूपगुण शील सुघरता इन वातन न रीझैये॥ [2]
सत कुल जन्म करम सुभ लक्षण वेदपुराण पढ़ैये। [3]
गोविन्द बिना स्नेह सुआ लों रसना कहाजु नचैये॥ [4]
- श्री गोविन्द स्वामी, श्री गोविन्द स्वामी जी की वाणी (343)
(राग नाता) प्रीतम प्रीत ही ते पाय। [1] हालाँकि सुंदरता इस देश को रास नहीं आती.. [2] अच्छे परिवार, अच्छे कर्म, अच्छे गुणों की शिक्षा वेदों और पुराणों में दी जानी चाहिए। [3] गोविंद बिना स्नेह सुआ लोन रसना कहजू नाचिए.. [4] - श्री गोविंद स्वामी, श्री गोविंद स्वामी जी की आवाज (343)