राजत दंपति कुंजमहल में
Govind Svami Vani — श्री गोविन्द स्वामी
Verse 23 of 26
(राग बिहागरो)
राजत दंपति कुंजमहल में।
बनि ठनि बैठे एक सेज पर डारे भुजा परस्पर गल में॥ [1]
करत बिनोद महा रँगभीने आनंद सहित पिय प्यारी।
‘गोविंद' दास कहाँ लौं बरनों राजत अति राधा गिरिधारी॥ [2]
- श्री गोविन्द स्वामी, श्री गोविन्द स्वामी जी की वाणी (519)
(राग बिहागारो) राजत दानपति कुंजमहल पुरुष। बानी ठनी एक दूसरे के गले में हाथ डाले बिस्तर पर बैठी है.. [1] करत बिनोद पिया पिया पिया बड़े बेरंग आनंद से। 'गोविंद' दास क्या कहूं चांदी अति राधा गिरिधारी.. [2] - श्री गोविंद स्वामी, श्री गोविंद स्वामी जी के वचन (519)