सखी री पोढ़े राधा रवन
Govind Svami Vani — श्री गोविन्द स्वामी
Verse 24 of 26
(राग सोरठ)
सखी री पोढ़े राधा रवन।
आवागमन नहीं काहू को भामिनी के भवन॥ [1]
सीख मोरीमान हो सजनी प्रात उठि कीजे हो गमन।
गोविन्द प्रभु पिय केलि करत है कंस काली दमन॥ [2]
- श्री गोविन्द स्वामी, श्री गोविन्द स्वामी जी की वाणी
(राग सोरठा) सखी री पोधे राधा रावणा। तुम भामिनी के घर क्यों नहीं जाते? कंस कलि का दमन करने के लिए ही गोविंद प्रभु पान करते हैं.. [2] - श्री गोविंद स्वामी, श्री गोविंद स्वामी जी के वचन