आजु बनी री कुञ्जेश्वरी रानी

Govind Svami Vani — श्री गोविन्द स्वामी

Verse 5 of 26

(राग केदारो) बेठे दोउ कुंज मंडप पिय प्यारी। दूल्है हो नवललाल गिरिधारी, दुलही संग श्रीवृषभान दुलारी॥ [1] लाल पाग लालन सिर सोभित, नवल सेहरो छवि लागत भारी। 'गोविंद' प्रभु पिय इह सुख देखत, अपनो तन मन वारी॥ [2] - श्री गोविन्द स्वामी, श्री गोविन्द स्वामी जी की वाणी (401) (राग केदारो) सटै दो कुंज मंडप पिया पियारी। दुल्हे नवललाल गिरिधारी हैं, दुल्हे के साथ श्री वृषभान दुलारी हैं.. [1] लाल पाँव साजे, छवि लगत भारी नवल सहारा। 'गोविंद' प्रभु, यह सुख पीयो, तन मन का ध्यान रखो.. [2] - श्री गोविंद स्वामी, श्री गोविंद स्वामी जी के वचन (401)
आजु बनी अति सारंग नैनीबाँके आसन बाँके सिंघासन