बाँके आसन बाँके सिंघासन
Govind Svami Vani — श्री गोविन्द स्वामी
Verse 6 of 26
(राग टोडी)
बाँके आसन बाँके सिंघासन, बाँके तकियन की छबि न्यारी।
बाँके रास विलास बने, बाँकी बनी राधा जू प्यारी॥ [1]
बाँके मन्दिर कंचन के अरु, बाँकी बनी व्रज की व्रजनारी।
गोविन्द नैना ताकि रहै झुकि, झाँके झरोखा में बाँकेबिहारी॥ [2]
- श्री गोविन्द स्वामी, श्री गोविन्द स्वामी जी की वाणी
(राग टूटता है) आसन, सिंहासन, तकिया बनने की छवि अनोखी है। बांके रास विलास बन गया, बांके राधा का प्रियतम बन गया.. [1] बांके कंचन का मंदिर बन गया, बांके व्रज की व्रजनारी बन गया। गोविंद की आँखें झुकी रहीं, खिड़की से झाँकते रहे, बाँकेबिहारी.. [2] - श्री गोविंद स्वामी, श्री गोविंद स्वामी जी के शब्द