हमें बृजराज लाड़िले सों काज

Govind Svami Vani — श्री गोविन्द स्वामी

Verse 7 of 26

(राग गौरी) हमें ब्रज-लाड़िले सों काज। जस अपजस कौ हमें डर नाँही, कहनी होय सो कहिये आज॥ [1] काहू कछु प्रीति करी कै नकरी जो, सन्मुख ब्रज नृप युवराज। 'गोविन्द' प्रभु की कृपा चाहिये, वे हैं सकल घोष-सिरताज॥ [2] - श्री गोविन्द स्वामी, श्री गोविन्द स्वामी जी की वाणी (573) (राग गौरी) हमन ब्रज-लडिले बेटा काज। अगर तुम मुझसे इतना प्यार करते हो तो मुझे कहानी बताओ.. [1] मैं कुछ भी कहूं तो मैं तुमसे प्यार क्यों करूं, मेरे सामने तो ब्रज का राजकुमार है। 'गोविंद' को भगवान की कृपा की आवश्यकता है, वे शिरोमणि हैं.. [2] - श्री गोविंद स्वामी, श्री गोविंद स्वामी जी की वाणी (573)
बाँके आसन बाँके सिंघासनहमें बृजराज लाड़िले सों काज