हमें बृजराज लाड़िले सों काज
Govind Svami Vani — श्री गोविन्द स्वामी
Verse 8 of 26
(राग गौरी एवं नट)
हमें बृजराज लाड़िले सों काज। [1]
यश अपयश को हमें कहा डर कहिनों होय कहिलेऊ आज॥ [2]
केधों काहू कृपा करीधों न करीजो सन्मुख व्रजनृप युवराज। [3]
गोविन्द प्रभु की कृपा चाहिए जो हैं सकल घोष सिरताज॥ [4]
- श्री गोविन्द स्वामी, श्री गोविन्द स्वामी जी की वाणी (573)
(राग गौरी एवन नाता) हमन बृजराज लड़ाइले बेटा काज। [1] यश और अपकीर्ति के विषय में क्या कहूँ? [2] हम अपने से पहले राजकुमार को क्यों प्रसन्न करें? [3] हमें सकल घोष सिरताज गोविंद प्रभु की कृपा चाहिए.. [4] - श्री गोविंद स्वामी, श्री गोविंद स्वामी जी की वाणी (573)