हौं तेरे वारनें मंद गति चलि
Hit Chaurasi — श्री हित हरिवंश महाप्रभु
Verse 14 of 43
(राग बिलावल)
बनी श्रीराधा मोहन की जोरी।
इंद्र नील मनि स्याम मनोहर, सात कुंभ तनु गोरी॥
भाल बिसाल तिलक हरि, कामिनि चिकुर चंद्र बिच रोरी।
गज नाइक प्रभु चाल, गयंदनि गति वृषभानु किसोरी॥
नील निचोल जुवति, मोहन पट पीत अरुन सिर खोरी।
(जै श्री) हित हरिवंश रसिक राधा पति, सुरत रंग में बोरी॥
श्री हित हरिवंश , हित चतुरासी (09)
(राग बिलावाला) बानी श्रीराधा मोहन की जोरी। इंद्र नील मणि स्याम मनोहर, सत कुंभ तनु गोरी.. भले बिसल तिलक हरि, कामिनी चिकुर चंद्र बिच रोरी। गज नायक प्रभु चल, गयन्दनि गति वृषभानु किसोरी.. नील निकोल जुवति, मोहन पट पीत अरुण सिर खोरी। (जय श्री) हित हरिवंश रसिक राधा पति, सूरत रंग में बोरी.. श्री हित हरिवंश, हित चतुरसी (09)