बनी श्रीराधा मोहन की जोरी

Hit Chaurasi — श्री हित हरिवंश महाप्रभु

Verse 15 of 43

(राग सारंग) बनी श्रीराधा मोहन की जोरी। इंद्रनील-मनि स्याम मनोहर, सात कुंभ-तनु गोरी॥ [1] भाल बिसाल तिलक हरि, कामिनि चिकुर-चंद्र बिच रोरी। गज-नाइक प्रभु चाल, गयंदनि-गति वृषभानु किसोरी॥ [2] नील-निचोल जुवति, मोहन पट-पीत अरुन सिर खोरी। जै श्रीहित हरिवंश रसिक राधा पति, सुरत-रंग में बोरी॥ [3] - श्री हित हरिवंश महाप्रभू, श्री हित चौरासी (9) (राग सारंगा) बानी श्रीराधा मोहन की जोरी। इन्द्रनीला-मणि श्यामा सुन्दर, सत कुम्भा-तनु गोरी..[1] यद्यपि बिसल तिलक हरि, कामिनी चिकुरा-चन्द्र बिचि रोरी। गज-नायक प्रभु चल, गयन्दनि-गति वृषभानु किसोरी।।[2] नीला-निकोल जुवति, मोहन पता-पीत अरुण सर खोरी। जय श्रीहित हरिवंश रसिक राधा पति, सुन्दर रंग बोरी.. [3] - श्री हित हरिवंश महाप्रभु, श्री हित चौरासी (9)
हौं तेरे वारनें मंद गति चलिऐसैं बसिऐ ब्रज की बीथिनि