आजु देखि व्रज सुन्दरी मोहन बनी केलि

Hit Chaurasi — श्री हित हरिवंश महाप्रभु

Verse 3 of 43

(राग टोड़ी) [शय्या समय] आजु देखि व्रज सुन्दरी मोहन बनी केलि। [1] अंस अंस बाहु दै किसोर जोर रूप रासि, मनौं तमाल अरुझि रही सरस कनक बेलि॥ [2] नव निकुंज भ्रमर गुंज, मंजु घोष प्रेम पुंज, गान करत मोर पिकनि अपने सुर सौं मेलि। [3] मदन मुदित अंग अंग, बीच बीच सुरत रंग, पलु पलु हरिवंश पिवत नैन चषक झेलि॥ [4] - श्री हित हरिवंश महाप्रभु, श्री हित चौरासी (17) (विच्छेदन) [शयनकाल] देखो आज व्रज सुन्दरी मोहन केली बन गयीं। [1] उत्तर उत्तर बहु ​​दै किशोर जोर रूप रासी, मनौं तमाल अरुझि रहे सरस कनक बेली। [2] नव निकुंज भ्रमर गुंज, मंजु घोष प्रेम पुंज, गण करत मोर पिकनी अपने सुर सौ मेलि। [3] मदन मुदित अंग अंग, बिच बिच सुरत रंग, पलु पलु हरिवंश पीवत नैन चषक झेली.. [4] - श्री हित हरिवंश महाप्रभु, श्री हित चौरासी (17)
आजु बन राजत जुगल किसोरदूलह मदनगोपाल राधा नव दुलही