प्रथम जथामति प्रनऊँ, श्री वृन्दावन अति रम्य।

Hit Chaurasi — श्री हित हरिवंश महाप्रभु

Verse 33 of 43

प्रथम जथामति प्रनऊँ, श्री वृन्दावन अति रम्य। श्री राधिका कृपा बिनु, सबके मननी अगम्य॥ - श्री हित हरिवंश महाप्रभु, श्री हित चतुरासी (57) सबसे पहले मैं आपको प्रणाम करता हूँ, श्री वृन्दावन अत्यंत सुन्दर है। श्री राधिका कृपा बिनु, सबके मन से अगम्य.. - श्री हित हरिवंश महाप्रभु, श्री हित चतुरसी (57)
प्यारे बोली भामिनी, आजु नीकी जामिनीऐसैं बसिऐ ब्रज की बीथिनि