ऐसैं बसिऐ ब्रज की बीथिनि

Hit Chaurasi — श्री हित हरिवंश महाप्रभु

Verse 34 of 43

(राग सारंग) प्रीति की रीति रँगीलोइ जानै। जछपि सकल लोक चूड़ामनि दीन अपनपौ माने॥ जमुना पुलिन निकुंज भवन में मान मानिनी ठानै। निकट नवीन कोटि कामिनि कुल धीरज मनहिं न आनै॥। नस्वर नेह चपल मधुकर ज्यौं आँन आँन सौं बानै। ( जै श्री ) हित हरिवंश चतुर सोई लालहिं छाड़ि मैंड़ पहिचानै॥ - श्री हित हरिवंश महाप्रभु, हित चौरासी (41) (राग सारंगा) प्रेम के मार्ग को रंगिलोई कहा जाता है। जंचापि सकल लोक चूड़ामणि दिवस अपनापौ मने.. जमुना पुलिन निकुंज भवन पुरुष मन मानिनी थानै। मेरे पास पूर्ण धैर्य वाली लाखों स्त्रियाँ हैं, न अमरत्व, न परिवर्तन, चपल मधुकर के जीवन में सौ हुई हैं। (जय श्री) हित हरिवंश चतुर सोइ ललहिं चढ़ि मैं पचनै.. - श्री हित हरिवंश महाप्रभु, हित चौरासी (41)
प्रथम जथामति प्रनऊँ, श्री वृन्दावन अति रम्य।बनी श्रीराधा मोहन की जोरी