प्यारे बोली भामिनी, आजु नीकी जामिनी
Hit Chaurasi — श्री हित हरिवंश महाप्रभु
Verse 36 of 43
(राग विभास)
प्यारे बोली भामिनी, आजु नीकी जामिनी;
भेंटि नवीन मेघ सौं दामिनी॥ [1]
मोहन रसिक राइ री माई तासौं जु मान करै,
ऐसी कौन कामिनी। [2]
(जै श्री) हित हरिवंश श्रवन सुनत प्यारी राधिका,
रमन सौं मिली गज गामिनी॥ [3]
- श्री हित हरिवंश महाप्रभु, श्री हित चौरासी (2)
(राग विभासा) प्रिया बोली भामिनि, आजु निकी जामिनी; नव मेघ सौ दामिनी प्रस्तुत की.. [1] मोहन रसिक रै री री माई तासुं जू मन कारी, कौन ऐसी लड़की है। [2] (जय श्री) हित हरिवंश श्रवण सुनत प्यारी राधिका, रमण सौ मिलि गज गामिनी.. [3] - श्री हित हरिवंश महाप्रभु, श्री हित चौरासी (2)