राधा प्यारी तेरे नैंन सलोल
Hit Chaurasi — श्री हित हरिवंश महाप्रभु
Verse 37 of 43
(राग धनाश्री)
राधा प्यारी तेरे नैंन सलोल।
तैं निजु भजन कनक तन जोवन, लियौ मनोहर मोल॥ [1]
अधर निरंग अलक लट छूटी, रंजित पीक कपोल।
तूँ रस मगन भई नहिं जानत, ऊपर पीत निचोल॥ [2]
कुच जुग पर नख रेख प्रकट मानौं,संकर सिर ससि टोल।
(जै श्री) हित हरिवंश कहत कछु भामिनि, अति आलस सौं बोल॥ [3]
- श्री हित हरिवंश महाप्रभु , श्री हित चौरासी (23)
(राग धनाश्री) राधा प्यारी तेरे नैनन सलोल। तैं निजु भजन कनक तन जोवन, लियौ मनोहर मोल.. [1] अधर निरंग अलक लत छूटि, रंजीत पिक कपोल। आप रस में मेरे भाई को नहीं जानते, लेकिन मैं हंसने के अलावा कुछ नहीं कर सकता। (जय श्री) हित हरिवंश कहते हैं 'कुच्छु भामिनी', कहते हैं 'बहुत खेद'.. [3] - श्री हित हरिवंश महाप्रभु, श्री हित चौरासी (23)