वृषभानु कुँवरि खेलति बसंत
Hit Chaurasi — श्री हित हरिवंश महाप्रभु
Verse 38 of 43
(राग बसंत)
राधे देखि वन की बात।
रितु बसंत अनंत मुकुलित कुसुम अरु फल पात॥ [1]
बैनुं धुनि नँदलाल बोली, सुनीSब क्यौं अर सात।
करत कतSब विलंब भामिनि वृथा औसर जात॥ [2]
लाल मरकत मनि छबीलौ तुम जु कंचन गात।
बनी श्री हित हरिवंश जोरी उभै गुन गन मात॥ [3]
- श्री हित हरिवंश महाप्रभु, हित चौरासी (28)
(राग बसंता)राधे देखी वन की बात। ऋतु है बसंत, अनन्त कलियाँ, फूल और फल-पत्तियाँ.. [1] बैनु धूनी नन्दलाल बोले, इतना क्यों सुन रहे हो? करत कटसब विल्नाभ भामिनी वृथा तथा औसर जात..[2] लाल पन्ना मनि छबीलौ तुम जू कंचन गत। बानी श्री हित हरिवंश जोरि उभय गुन गण मत.. [3] - श्री हित हरिवंश महाप्रभु, हित चौरासी (28)