बनी श्रीराधा मोहन की जोरी

Hit Chaurasi — श्री हित हरिवंश महाप्रभु

Verse 5 of 43

(राग सारंग व राग बिलावल) आजु नागरी किसोर, भाँवती विचित्र जोर, कहा कहौं, अंग अंग परम माधुरी। [1] करत केलि कंठ मेलि बाहु दंड गंड-गंड, परस, सरस रास लास मंडली जुरी॥ [2] स्याम-सुंदरी विहार, बाँसुरी मृदंग तार, मधुर घोष नूपुरादि किंकनी चुरी। [3] (जै श्री) देखत हरिवंश आलि, निर्त्तनी सुधंग चलि, वारि फेरि देत प्राँन देह सौं दुरी॥ [4] - श्री हित हरिवंश महाप्रभु, श्री हित चौरासी (10) (राग सारंग वे राग बिलावाला) अजू ​​नागरी किशोर, भनवती विचित्र जोर, कह कहौं, अंग अंग परम माधुरी। [1]. (10)
दूलह मदनगोपाल राधा नव दुलहीप्यारे बोली भामिनी, आजु नीकी जामिनी