प्यारे बोली भामिनी, आजु नीकी जामिनी

Hit Chaurasi — श्री हित हरिवंश महाप्रभु

Verse 6 of 43

(राग विभास) आजु प्रभात लता मंदिर में, सुख वरषत अति हरषि जुगल वर। [1] गौर स्याम अभिराम रंग भरे, लटकि लटकि पग धरत अवनि पर॥ [2] कुच कुमकुम रंजित मालावलि, सुरत नाथ श्रीस्याम धाम धर। [3] प्रिया प्रेम के अंक अलंकृत, चित्रित चतुर सिरोमनि निजु कर॥ [4] दंपति अति अनुराग मुदित कल, गान करत मन हरत परस्पर। [5] (जै श्री) हित हरिवंश प्रसंसि परायन, गायन अलि सुर देत मधुर तर॥ [6] - श्री हरिवंश महाप्रभू, श्री हित चौरासी (5) (राग विभास) अजु प्रभात लता मंदिर, सुखु प्राणस्थ, अति हरषि जुगल वर। [1] गौर स्याम अभिराम, रंगों से भरपूर, धरती के चरणों में लटकती लताएँ। [2] कुछ कुमाकुम रणजीत मलावली, सुरत नाथ श्रीस्याम धाम धार। [3] प्रिये, अपने प्रेम चिन्हों को सजाओ और रंगो, अपने चतुर सिर को सजाओ… [4] अमीर आदमी बहुत प्यारा है, कल शुभ है, वह एक दूसरे के दिलों को गिनता है। [5] (जय श्री) हित हरिवंश प्रसन्नसि परायण, मधुर तान गाकर.. [6] - श्री हरिवंश महाप्रभु, श्री हित चौरासी (5)
बनी श्रीराधा मोहन की जोरीप्यारे बोली भामिनी, आजु नीकी जामिनी