प्यारे बोली भामिनी, आजु नीकी जामिनी

Hit Chaurasi — श्री हित हरिवंश महाप्रभु

Verse 7 of 43

(राग विभास) आजु तौ जुवति तेरौ वदन आनंद भरयौ, पिय के संगम के सूचत सुख चैन। आलस बलित बोल, सुरँग रँगे कपोल, विथकित अरुन उनींदे दोउ नैंन॥ [1] रुचिर तिलक लेस, किरत कुसुम केस; सिर सीमंत भूषित मानौं तैं न। करुना करि उदार राखत कछु न सार; दसन वसन लागत जब दैंन॥ [2] काहे कौं दुरत भीरु पलटे प्रीतम चीरु, बस किये स्याम सिखै सत मैंन। गलित उरसि माल, सिथिल किंकनी जाल, (जै श्री) हित हरिवंश लता गृह सैंन॥ [3] - श्री हरिवंश महाप्रभु , श्री हित चौरासी (4) (राग विभास) अजु तौ जुवति तेरा संसार आनंदमय है, प्रिय मिलन का सुख-शांति है। अलस बलित बोल, सुरंग रेंज कपोल, विथकिट अरुण उनिंदे दोऊ नैन.. [1] रुचिर तिलक लेस, किरत कुसुम केसा; सर सिंट भूषित मनौं ताई एन. दयालु और उदार बनें, आपके पास कुछ भी नहीं बचेगा; दासन वसन लगत जब दैन.. [2] कौन करे जल्दी, भय, चख, प्रेम, प्रेम, बस अँधेरे में करो, सत्य सिखाओ। गलित उर्सि माल, सिथिल किंकानि जल, (जय श्री) हित हरिवंश लता गृह नं.. [3] - श्री हरिवंश महाप्रभु, श्री हित चौरासी (4)
प्यारे बोली भामिनी, आजु नीकी जामिनीराधा प्यारी तेरे नैंन सलोल