अति ही अरुन तेरे नयन नलिन री

Hit Chaurasi — श्री हित हरिवंश महाप्रभु

Verse 9 of 43

(राग बिलावल) अति ही अरुन तेरे नयन नलिन री। [1] आलस जुत इतरात रँगमगे, भये निसि जागर मषिन मलिन री॥ [2] सिथिल पलक में उठति गोलक गति, बिंधयौ मोंहन मृग सकत चलि न री। [3] (जै श्री) हित हरिवंश हंस कल गामिनि, संभ्रम देत भ्रमरनि अलिन री॥ [4] - श्री हरिवंश महाप्रभू, श्री हित चौरासी (8) (राग बिलावाला) हे अरुण, तुम्हारी आंखें आंसुओं से भरी हैं। [1]. [3] (जय श्री) हित हरिवंश हंस काल गामिनी, संभ्रम देत भ्रमरनि अलिन री.. [4] - श्री हरिवंश महाप्रभु, श्री हित चौरासी (8)
राधा प्यारी तेरे नैंन सलोलराधा प्यारी तेरे नैंन सलोल