तेरौई ध्यान राधिका प्यारी गोवर्द्धनधर लालहिं

Hit Sfut Vani — श्री हित हरिवंश महाप्रभु

Verse 16 of 26

(राग गौरी) तेरौई ध्यान राधिका प्यारी गोवर्द्धनधर लालहिं। कनक लता सी क्यों न बिराजत, अरुझी श्याम तमालहिं॥ [1] गौरी गान सुतान ताल गहि, रिझवति क्यौं न गुपालहिं। यह जोवन कंचन-तन ग्वालिन, सफल होत इहिं कालहि॥ [2] मेरे कहैं विलंब न करि सखि, भूरि भाग अति भालहिं। (जैश्री) हित हरिवंश उचित हौं चाहति, श्याम कंठकी मालहिं॥ [3] - श्री हित हरिवंश महाप्रभु, श्री हित स्फुट वाणी (17) (राग गौरी) तेरुई ध्यान राधिका प्यारी गोवर्धनधर ललहिं। कनक लता बन क्यों नहीं बैठती, अरूझि श्याम तमलाहिन.. [1] गौरी गण सुतन ताल गाही, रिजवती क्यों नहीं गुपलाहिन। सुनहरे शरीर वाला यह युवा चरवाहा यहां सफल हो रहा है.. [2] यह कहने में संकोच न करें, मेरे दोस्त, भूरा हिस्सा बहुत अच्छा है। (जयश्री) हित हरिवंश उचित है, मुझे चाहिए श्याम कंथकि मलाहिं.. [3] - श्री हित हरिवंश महाप्रभु, श्री हित स्फुट वाणी (17)
ना जानो छिन अंत कवन बुधि घटहि प्रकासितना जानो छिन अंत कवन बुधि घटहि प्रकासित