ना जानो छिन अंत कवन बुधि घटहि प्रकासित
Hit Sfut Vani — श्री हित हरिवंश महाप्रभु
Verse 18 of 26
वृषभानु नंदिनी राजति हैं।
सुरत-रंग-रस भरी भामिनी, सकल नारि सिर गाजति हैं॥ [1]
इत-उत चलति, परत दोऊ पग, मद-गयंद गति लाजति हैं।
अधर निरंग, रंग गंडनि पर, कटक काम कौ साजति हैं॥ [2]
उर पर लटक रही लट कारी, कटिव किंकिनी बाजति हैं।
(जैश्री) हित हरिवंश पलटि प्रीतम पट, जुवति जुगति सब छाजति हैं॥ [3]
- श्री हित हरिवंश महाप्रभु, श्री हित स्फुट वाणी (15)
वृषभानु नंदिनी राजति हैं। सुरता-रंगा-रस भारी भामिनि, सकल नारी सिर गजति।।[1] इता-उत चलति, परत युगल चरण, मद-गंद गति लजति। तल बेरंग है, रंग माटी पर है, शिखाएं काम सजाती हैं.. [2] कंधे पर लटके धागे, कड़वे बजाते हैं किंकिनी। (जयश्री) हित हरिवंश पलति प्रीतम पत, जुवति जुगति सब चजति हैं.. [3] - श्री हित हरिवंश महाप्रभु, श्री हित स्फुट वाणी (15)