मोहन लाल के रंग राँची
Hit Sfut Vani — श्री हित हरिवंश महाप्रभु
Verse 19 of 26
(राग बिलावल एवं धनाश्री)
मोहन लाल के रंग राँची।
मेरे ख्याल परौ जिनि कोऊ, बात दसौं दिसि माँची॥ [1]
कंत अनंत करौ जो कोऊ, बात कहौं सुनि साँची।
यह जिय जाहु भलैं सिर ऊपर, हौंऽव प्रगट ह्वै नाँची॥ [2]
जागत शयन रहत उर ऊपर, मनि कंचन ज्यौं पाँची।
(जै श्री) हित हरिवंश डरौं काके डर, हौं नाहिन मति काँची॥ [3]
- श्री हित हरिवंश महाप्रभु, श्रीहित स्फुट वाणी (12)
(राग बिलावल एवन धनाश्री) मोहन लाल के रंग रांची. मेरे खलन परौ जिनि कुओ, बट दसौं दिसि मांची.. [1] कुछ मत करो, लेकिन बताओ, सुनो सांची। मैं यहां रहता हूं, अच्छाई मेरे सिर पर है, मेरी आवाज दिखाई देती है... [2] दुनिया मेरे ऊपर सोती है, मेरा मन एक पक्षी की तरह है। (जय श्री) हित हरिवंश दारौं काके दर, हौं नहीं माटी कांची.. [3] - श्री हित हरिवंश महाप्रभु, श्री हित स्फुट वाणी (12)