दोऊ जन भीजत अटके बातन

Hit Sfut Vani — श्री हित हरिवंश महाप्रभु

Verse 20 of 26

(राग मलहार) दोऊ जन भीजत अटके बातन। नव निकुंज के द्वारे ठाड़े अम्बर लपटे गातन॥ [1] ललिता ललित रूप रस भींजी बूँद बचावत पातन। (श्री) 'हित हरिवंश' परस्पर प्रीतम मिलवति रति रस घातन॥ [2] - श्री हित हरिवंश महाप्रभु, स्फुट वाणी (23) (राग मल्हारा) दोऊ जन भीजत अतके बातन। वे नव निकुंज से अम्बर लपेटकर आये। [1] ललिता ललित रूप रस भिनजी बांध बचत पाटन। (श्री) 'हित हरिवंश' परस्पर प्रेम, मिश्रित प्रेम.. [2] - श्री हित हरिवंश महाप्रभु, स्पष्ट वाणी (23)
मोहन लाल के रंग राँचीरसना कटौ जो अन रटौ