होरी में लाज न रहे प्यारी
Kishori Kripa Kataksha — श्री ललित लड़ैती
Verse 10 of 37
(राग सारंग रसिया)
होरी में लाज न रहे प्यारी।
रसिया फिरत बजावत डफली, गावत लाज भरी गारी॥ [1]
मूंठ गुलाल इतै उत फेंकत, गैल रोक रह्यौ ब्रज नारी।
ललित लड़ैती कठिन है बचिवो, छैल करत ऊधम भारी॥ [2]
- श्री ललित लड़ैती, श्री किशोरी कृपा कटाक्ष, वर्षोत्सव पद (35)
(राग सारंग रसिया) होरी में मत शरमाओ प्रिये। रसिया फिरत बजावत डफाली, गावत लाज भरी गारी.. [1] मुंठ गुलाल इटै उत फेंकत, गेल रोक रहयौ ब्रज नारी। ललित लड़ैती कथन बचिवो, छैल करत उधम भारी.. [2] - श्री ललित लड़ैती, श्री किशोरी कृपा कटाक्ष, वर्ष महोत्सव छंद (35)