देहु निकुंज निवास स्वामिनी
Kishori Kripa Kataksha — श्री ललित लड़ैती
Verse 9 of 37
(राग भैरवी वा ईमन)
हा हा मैं सब भाँति विगारी॥ टेक॥
मेट मेंड श्रुतिशास्त्र लाज जग, कुलकी कान सकल निरवारी॥ [1]
उक-चूक सब क्षमहु किशोरी, चित्त न धरो मौ औगुन भारी॥
ललित लड़ैती देह बास ब्रज, ज्यों-त्यों पुरिवौ आसा प्यारी॥ [2]
- श्री ललित लड़ैती, श्री किशोरी कृपा कटाक्ष, विनय (4)
(राग भैरवी वा इम्ना) हा हा मैं सब भट्टी विगारी.. टेक.. मते मेंड श्रुति शास्त्र लाज जग, कुलकि कण सकल निरावारी.. [1] उका-चुक सब क्षमाहु किशोरी, चित्त न धरो मौ औगुन भारी.. ललित लड़ैती देह बस ब्रज, ज्यों-त्यो पुरिउ अस प्यारी.. [2] - श्री ललित लड़ैती, श्री किशोरी कृपा व्यंग्य, शील (4)