जापै चढ़े युगल को रंग
Kishori Kripa Kataksha — श्री ललित लड़ैती
Verse 11 of 37
(राग झंझौटी)
जापै चढ़े युगल को रंग।
भूल जाय त्रिभुवन सुख पल में, निरखत दम्पति अंग॥ [1]
तोरि कानि कुल फारे घूंघट, नैन नीर सुर भंग।
ललित लड़ैती नाचै गावै, मतवारन से ढंग॥ [2]
- श्री ललित लड़ैती, श्री किशोरी कृपा कटाक्ष, विनय (69)
(राग झंझोटी) युगल रंग जपो। भूल जय त्रिभुवन सुख के क्षण में, अलिखित युगल काया। [1] हर पर्दा छूट गया, हर आंख विलीन हो गई। ललित लड़ैती ने गायक के रूप में नृत्य किया, मातवरण के ढंग से.. [2] - श्री ललित लड़ैती, श्री किशोरी कृपा व्यंग्य, विनय (69)