श्री किशोरी कृपा कटाक्ष

Kishori Kripa Kataksha

श्री ललित लड़ैती · 37 verses · Braj

  1. 1. मो सम कौन कुटिल अविचारी
  2. 2. देहु निकुंज निवास स्वामिनी
  3. 3. देहु निकुंज निवास स्वामिनी
  4. 4. भानुनन्दिनी मो तन हेरो
  5. 5. देहु निकुंज निवास स्वामिनी
  6. 6. देहु निकुंज निवास स्वामिनी
  7. 7. देहु निकुंज निवास स्वामिनी
  8. 8. देहु निकुंज निवास स्वामिनी
  9. 9. देहु निकुंज निवास स्वामिनी
  10. 10. होरी में लाज न रहे प्यारी
  11. 11. जापै चढ़े युगल को रंग
  12. 12. देहु निकुंज निवास स्वामिनी
  13. 13. झूलत ये दोऊ रूप अपार
  14. 14. करुणा करि वन वास दीजिए
  15. 15. लोक लाज कुल कान की
  16. 16. माल खजाना हीरा मोती
  17. 17. मो सम कौन कुटिल अविचारी
  18. 18. जापै चढ़े युगल को रंग
  19. 19. भानुनन्दिनी मो तन हेरो
  20. 20. पड़त हौं पैयां कुञ्ज विहारिनी
  21. 21. प्रान पिया प्रीतम प्यारे को
  22. 22. देहु निकुंज निवास स्वामिनी
  23. 23. माल खजाना हीरा मोती
  24. 24. रे मन क्यों चाटे जग धूर
  25. 25. रे मन मान कही इक मेरी
  26. 26. देहु निकुंज निवास स्वामिनी
  27. 27. देहु निकुंज निवास स्वामिनी
  28. 28. श्री वृन्दावन यमुना कूलन
  29. 29. श्यामा श्याम लगन जिहिं लागै
  30. 30. देहु निकुंज निवास स्वामिनी
  31. 31. देहु निकुंज निवास स्वामिनी
  32. 32. देहु निकुंज निवास स्वामिनी
  33. 33. श्री वृन्दावन यमुना कूलन
  34. 34. युगल लाल रसना रट मनुआ
  35. 35. हे स्वामिनि हर्षामिनि भामिनि अब मेरी सुधि लीजै
  36. 36. ललित लड़ैती कुँवरि बिनु और न कछुक सुहाई
  37. 37. ललित लड़ैती कुँवरि बिनु और न कछुक सुहाई