लोक लाज कुल कान की

Kishori Kripa Kataksha — श्री ललित लड़ैती

Verse 15 of 37

लोक लाज कुल कान की, लगी हिये में आग। ललित लड़ैती युगल सों, कब होवै अनुराग॥ - श्री ललित लड़ैती, श्री किशोरी कृपा कटाक्ष, माधुर्य रस दोहावली (77) सारी लोक लज्जा मिट गयी, केवल क्रोध आया। ललित लड़ैती दम्पति को पुत्र अनुराग कब होगा.. - श्री ललित लड़ैती, श्री किशोरी कृपा व्यंग्य, माधुर्य रस दोहावली (77)
करुणा करि वन वास दीजिएमाल खजाना हीरा मोती