माल खजाना हीरा मोती
Kishori Kripa Kataksha — श्री ललित लड़ैती
Verse 16 of 37
(राग लावनी छन्द)
माल खजाना हीरा मोती, पल छिन मांहिं लुटावैंगे।
त्रिभुवन शाही जान गदाई, बायें हाथ बहावैंगे॥ [1]
श्री वृन्दावन सेवा महलन, कुञ्ज खवासी पावैंगे।
ललित लड़ैती रूप अमीरस, लोचन तृषित पियावैंगे॥ [2]
- श्री ललित लड़ैती, श्री किशोरी कृपा कटाक्ष, विनय (22)
(राग लावणी छंद) धन-दौलत, खजाना, हीरे-मोती, हम हर पल ऐसे ही गुजारेंगे। त्रिभुवन शाही जन गदाई, बायां हाथ बहे। [1] कुनिज खवासी में श्री वृन्दावन सेवा महल मिलेगा। ललित लड़ैती रूप अमीरस, लोचन तृषित पियवांगे.. [2] - श्री ललित लड़ैती, श्री किशोरी कृपा कटाक्ष, विनय (22)