जापै चढ़े युगल को रंग
Kishori Kripa Kataksha — श्री ललित लड़ैती
Verse 18 of 37
(राग झंझौटी)
मो सम कौन कुटिल खल बीर।
सुनि-सुनि कथा युगलवर श्रवणन, बहत प्रवाह न नैनन नीर॥ [1]
नाम रटत मुख श्याम राधिका, पुलकित होत न गात शरीर।
ललित लड़ैती अति कठोर उर, भाव बैन जिमि लगत न हीर॥ [2]
- श्री ललित लड़ैती, श्री किशोरी कृपा कटाक्ष, विनय (27)
(राग झंझोटी) मो सम कौन कुटिल खल बीर। युगलावर श्रवण की कथा सुनी, बहुत रस बह गया, नेत्रों में आँसू न आये.. [1] श्यामा राधिका के मुख पर नाम जपते-जपते, शरीर पुलकित हो गया, न हिले न हिले। ललित लड़ैती अति कथोर उर, भाव बन जिमि लगत न हिर.. [2] - श्री ललित लड़ैती, श्री किशोरी कृपा व्यंग्य, विनय (27)