देहु निकुंज निवास स्वामिनी

Kishori Kripa Kataksha — श्री ललित लड़ैती

Verse 2 of 37

बस वृन्दावन धाम में, जो चाहे विश्राम। कालिंदी जल पान कर, रट मुख राधाश्याम॥ - श्री ललित लड़ैती, श्री किशोरी कृपा कटाक्ष, माधुर्य रस दोहावली (8) बस वृन्दावन धाम में विश्राम करो, जो चाहो। कालिंदी जल पीकर राधाश्याम का पाठ करें.. - श्री ललित लड़ैती, श्री किशोरी कृपा व्यंग्य, माधुर्य रस दोहावली (8)
मो सम कौन कुटिल अविचारीदेहु निकुंज निवास स्वामिनी