देहु निकुंज निवास स्वामिनी

Kishori Kripa Kataksha — श्री ललित लड़ैती

Verse 3 of 37

भलें करो जप योग तप, दान धर्म ब्रत नेम। ‘ललित लड़ैती’ प्रेम बिन, स्वपने कुशल न क्षेम॥ - श्री ललित लड़ैती, श्री किशोरी कृपा कटाक्ष, माधुर्य रस दोहावली (106) अच्छे कर्म करो, योग करो, तप करो, दान करो, धर्म करो, व्रत करो, नाम जपो। 'ललित लड़ैती' प्रेम के बिना, स्वप्न के बिना, समृद्धि नहीं.. - श्री ललित लड़ैती, श्री किशोरी कृपा व्यंग्य, माधुर्य रस दोहावली (106)
देहु निकुंज निवास स्वामिनीभानुनन्दिनी मो तन हेरो