प्रान पिया प्रीतम प्यारे को

Kishori Kripa Kataksha — श्री ललित लड़ैती

Verse 21 of 37

(राग धनाश्री) प्रान पिया प्रीतम प्यारे को, आज रंग में बोरूं। अंक भरूं न डरूं कलंक मैं, लोक लाज तृण तोरूं॥ [1] वा बिन परत न चैन एक छिन, जातें तोहि निहोरूं। ललित लड़ैती बेग मिला उन, पायँ लाग कर जोरूं॥ [2] - श्री ललित लड़ैती, श्री किशोरी कृपा कटाक्ष (राग धनाश्री) प्राण पिया प्रीतम प्यारे को, आज रंग में बोरुन। अंक भरुं न दारुण कलंक मैं, लोक लाज त्रिन तोरुं.. [1] वा बिन परत एन चैन एक छिन, जतेन तोहि निहोरुं। उनसे मिले ललित लड़ैती बेग, जोरुन की कलम से.. [2] - श्री ललित लड़ैती, श्री किशोरी कृपा व्यंग्य
पड़त हौं पैयां कुञ्ज विहारिनीदेहु निकुंज निवास स्वामिनी