देहु निकुंज निवास स्वामिनी
Kishori Kripa Kataksha — श्री ललित लड़ैती
Verse 22 of 37
रसिकन को सतसंग कर, सीख भावना ध्यान।
ललित लड़ैती युगल भज, जासों होय कल्यान॥
- श्री ललित लड़ैती, श्री किशोरी कृपा कटाक्ष, माधुर्य रस दोहावली (30)
रसिकन पर सत्संग करके भावना ध्यान सीखें। ललित लड़ैती युगल भज, जेसन होय कल्याण.. - श्री ललित लड़ैती, श्री किशोरी कृपा कटाक्ष, माधुर्य रस दोहावली (30)