माल खजाना हीरा मोती

Kishori Kripa Kataksha — श्री ललित लड़ैती

Verse 23 of 37

(राग लावनी छन्द) रटत रटत राधा-मनमोहन अपनो जनम बितावेंगे। लिखत लिखत लीला रस दम्पति नैनन नीर बहावेंगे॥ [1] सुनत सुनत गुण छैल छबीली निशिदिन प्रेम बढ़ावेंगे। ललित लड़ैती अचल वास व्रज ऐसे दिन कब आवेंगे॥ [2] - श्री ललित लड़ैती, श्री किशोरी कृपा कटाक्ष, विनय (21) (राग लावणी छंद) रटत रटत राधा-मनमोहन जन्म बिताओ। लिखत लिखत लीला रस, युगल के नेत्रों से बहेंगे अश्रु। [1] सुनत सुनत गुन छैल छबीली निशिदिन प्रेम बढेगा। ऐसे दिन ललित लड़ैती अचल वास व्रज कब बदला लेगा.. [2] - श्री ललित लड़ैती, श्री किशोरी कृपा व्यंग्य, विनय (21)
देहु निकुंज निवास स्वामिनीरे मन क्यों चाटे जग धूर