रे मन मान कही इक मेरी

Kishori Kripa Kataksha — श्री ललित लड़ैती

Verse 25 of 37

(राग खट) रे मन मान कही इक मेरी। चूर-चूर ह्वै व्रजरज मिलजा, यामें शोभा तेरी॥ [1] क्यों सोवत अज्ञाननींद में यह चलिवे की बेरी। ललित लड़ैती जाग युगल भज, अब न लगा बहु देरी॥ [2] - श्री ललित लड़ैती, श्री किशोरी कृपा कटाक्ष, विनय (31) (गाते हुए) अरे यार, मेरे दिमाग में केवल एक ही बात है। चुरा-चूर वा व्रजराज मिलजा, यामेन शोभा तेरी.. [1] अज्ञानी लोग ऐसा क्यों सोचते हैं कि यह चालीवे की बेर है? ललित लड़ैती जग युगल भज, अब न विलंब बहुरि.. [2] - श्री ललित लड़ैती, श्री किशोरी कृपा कटाक्ष, विनय (31)
रे मन क्यों चाटे जग धूरदेहु निकुंज निवास स्वामिनी