देहु निकुंज निवास स्वामिनी
Kishori Kripa Kataksha — श्री ललित लड़ैती
Verse 26 of 37
रे मन तज सुख विषय रस वस वृन्दावन धाम।
ललित लड़ैती मिल रसिक रट मुख राधा श्याम॥
- श्री ललित लड़ैती, श्री किशोरी कृपा कटाक्ष, माधुर्य रस दोहावली (23)
हे मन, सुख, विषय, स्वाद और वृन्दावन धाम। ललित लड़ैती मिल रसिक रट मुख राधा श्याम.. - श्री ललित लड़ैती, श्री किशोरी कृपा व्यंग्य, माधुर्य रस दोहावली (23)