देहु निकुंज निवास स्वामिनी

Kishori Kripa Kataksha — श्री ललित लड़ैती

Verse 27 of 37

शाक पात वा कंद फल, जो कछु मिलै अहार। वृंदावन नहीं छोड़िये, सुस्थल युगल विहार॥ - श्री ललित लड़ैती, श्री किशोरी कृपा कटाक्ष, माधुर्य रस दोहावली (6) सब्जियाँ, फल या कन्द, जो भी उपलब्ध हो वही भोजन है। वृन्दावन मत छोड़ो, आलसी युगल विहार.. - श्री ललित लड़ैती, श्री किशोरी कृपा व्यंग्य, माधुर्य रस दोहावली (6)
देहु निकुंज निवास स्वामिनीश्री वृन्दावन यमुना कूलन